बड़े और पूजनीय लोगों के संबोधन के आगे जी क्यों लगाया जाता है?


ये आदरसूचक शब्द, संस्कृत के जित या युत शब्द से बना है। जित का प्राकृत रूप जिव होता है।

शुभकामना के अर्थ में जित यानी आपकी जय हो आप विजयी हों। युत का प्राकृत रूप युक होता है जो हिंदी में आते-आते जू हो गया और कालांतर में जी में बदल गया।

आज भी भारत की कई प्रादेशिक भाषाओं में, आदरसूचक शब्द जी के अर्थ में जू का प्रयोग किया जाता है, जैसे दाऊ जू, कहो जू यानी दाऊ जी, कहो जी।



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