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बालक को जब कान पर जोर से थप्पड़ मारा जाता है तो वह असंतुलित होकर नीचे क्यों गिर जाता है?

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 बालक के जब कान पर जोर से थप्पड़ मारा जाता है तो वह असंतुलित होकर नीचे गिर जाता है क्योंकि कान के अन्तःकर्ण में अर्द्धवर्ताकार नलिकाएँ होती हैं जो शरीर के सन्तुलन को बनाये रखती है। जब बालक को थप्पड़ मारा जाता है तो अर्धवृताकार नलिकाओं में भरा द्रव हिल जाता है तथा बालक असंतुलित होकर गिर जाता है।

-क्या कारण है कि तना हमेशा ऊपर की ओर तथा जड़े नीचे की ओर ही बढ़ती है?

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बीज अंकुरित होने के बाद जड़े निकलती है तथा ऊपर की ओर तना निकलती है। जड़े हमेशा नीचे की ओर ही बढ़ती है क्योंकि एक विशेष बल के खिंचाव से जिस धनात्मक भू-अभिवर्तन कहते है। इसके प्रभाव से जड़े हमेशा नीचे की ओर बहती है उसी तरह से तना सदैव प्रकाश की ओर ही बढ़ेगा क्योंकि ऊपर की ओर एक विशेष बल के खिंचाव से जिस ऋणात्मक भू-अभिवर्तन कहते हैं के कारण ऊपर की ओर बढ़ती है

चोरों का पता लगाने में अंगुलियों के निशान के साथ-साथ पेरों के निशान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन निशानों को सबूत के लिए कैसे सुरक्षित रखा जाता है?

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जहाँ पर चोर के पैरों के निशान नज़र आता है उसके चारों ओर कार्ड बोर्ड की एक पतली लम्बी पट्टी काटकर जमीन में धंसाते है तथा प्लास्टर ऑफ़ पेरिस के पानी के साथ मिलाकर क्रीम जैसा गाढ़ा घोल तैयार करके घोल को गत्ते के घेरे में पलट देते है। प्लास्टर ऑफ़ पेरिस के सूखने (8-10 घंटे) तक गत्ते को हटाकर इसे जमीन से अलग कर इसके नीचे की ओर चिपकी मिट्टी को अलग कर लेते है और इसके ऊपर चिकनाई ग्रीस, सरसों का तेल मलते हैं

ऊँचाई पर ऑक्सीजन की कमी होती है फिर भी पहाड़ों पर रहने वाले व्यक्ति बड़ी सक्रियता से अपने जीवन की गतिविधियाँ कैसे कर लेते हैं?

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अधिक ऊँचाई पर ऑक्सीजन की कमी होती है फिर भी ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों के निवासी बड़ी सक्रियता से जीवन की गतिविधियाँ कर लेते हैं क्योंकि ऐसे क्षेत्र के निवासी अधिक ऊँचाई के प्रति अनुकूलित हो जाते है।इनकी वक्षगुहा का आयतन अधिक होता है जिससे इनके फेफड़ों के वायुकोषों का सतही क्षेत्र अधिक हो जाता है।इनके रुधिर में लाल रुधिर कणिकाओं की संख्या अधिक होती है तथा ऊतकों जे मध्य अपेक्षाकृत अधिक सघन कोशिका जाल होता है। परिश्रम करने से उनकी पेशियों में कम केशिका किण्वन होता है और लेवटेर की मात्रा कम बनती है अतः इन्हें श्रम से होने वाली थकान को दूर करने के लिए कम ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।

साबुन मैल को कैसे साफ़ करता है?

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साबुन सोडियम या पौटेशियम लवण तथा वसीय अम्लों का मिश्रण होता है जो पानी में शोधन क्रिया करता है| सोडियम स्टेराइट,सोडियम ओलिएट और सोडियम पल्मिटेट साबुन के ही कुछ उदाहरण हैं जिनका निर्माण क्रमशः स्टियरिक अम्ल (stearic acid), ओलिक अम्ल व पामिटिक अम्ल से होता है | साबुन में वसा और तेल पाए जाते हैं | अधिकांश मैल तेल किस्म का होता है इसीलिए जब मैले वस्त्र को साबुन के पानी में डाला जाता है तो तेल और पानी के बीच का पृष्ठ तनाव बहुत कम हो जाता है और वस्त्र से अलग होकर मैल छोटी- छोटी गोलियों के रूप में तैरने लगता है| ऐसा यांत्रिक विधि से हो सकता है अथवा साबुन के विलयन में उपस्थित वायु के छोटे-छोटे बुलबुलों के कारण हो सकता है। साबुन का इमल्शन अलग हुए मैल को वापस कपड़े पर जमने से रोकता है | 

चमगादड़ रात्रि के अँधेरे में भी कैसे उड़ सकते हैं?

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चमगादड़ रात्रि में पराश्रव्य ध्वनि उत्पन्न करके एक निश्चित दिशा में उड़ते है यदि उनके उड़ने की दिशा में अवरोध है तो उस अवरोध से यह पराश्रव्य ध्वनि टकराकर लोटेंगी। टकराकर लौटने वाली इस पराश्रव्य ध्वनि को चमगादड़ सुनते है। जिससे उन्हें पता चल जाता है कि आगे अवरोध है इस प्रकार अवरोध का पता चलने पर वे अपनी गति की दिशा बदल लेते है। इस प्रकार चमगादड़ रात्रि के अँधेरे में भी उड़ सकती है।

रॉकेट का ऊपरी भाग शंकुनुमा क्यों बनाया जाता है?

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अंतरिक्ष यानों को वायुमंडल से ऊपर उड़ना होता है इसलिए वे अपना ईंधन एवं आक्सीजन लेकर उड़ते हैं। जेट विमान में केवल ईंधन रहता है। जब विमान चलना प्रारम्भ करता है तो विमान के सिरे पर बने छिद्र से बाहर की वायु इंजन में प्रवेश करती है। वायु के आक्सीजन के साथ मिलकर ईंधन अत्यधिक दबाव पर जलता है। जलने से उत्पन्न गैस का दाब बहुत अधिक होता है। यह गैस वायु के साथ मिलकर पीछे की ओर के जेट से तीव्र वेग से बाहर निकलती है। यद्यपि गैस का द्रव्यमान बहुत कम होता है किन्तु तीव्र वेग के कारण संवेग और प्रतिक्रिया बल बहुत अधिक होता है। वायुमंडल के प्रतिरोध को कम करने एवं वायुमंडल के घर्षण से जलकर नष्ट होने से बचाने के लिए रॉकेट का ऊपरी भाग शंकुनुमा बनाया जाता है। इसलिए जेट विमान आगे की ओर तीव्र वेग से गतिमान होता है।