सपने क्यों आते है?
अभी तक ठीक ठीक नहीं पता चल पाया हैं की सपने क्यों आते हैं। मानव सदियों से दिमाग की मदद से अपने आस पास चल रही चीजों, घटनाओ आदि का रहश्य ढूंढ पाया हैं। वो तमाम खोजों और आविष्कारो से अपने जीवन को सुखमय बना पाया हैं।
आज मानव चाँद तारे, ग्रह नक्षत्रों के बारे में ठीक ठीक जानकारी रखता हैं। दिमाग की मदद से वो अपने भूत, वर्तमान यहाँ तक की भविष्य की भी सटीक विवरण प्राप्त कर लेता हैं। रोगों से लड़ लेता हैं तो कभी नए नए रोग उत्पन्न भी कर देता हैं। परन्तु एक चीज़ जो अभी तक रहश्य के पर्दों में घिरा हैं वो हैं हमारा दिमाग। आज भी वैज्ञानिक ठीक ठीक नहीं समझ पाए हैं की हमारा दिमाग कैसे काम करता हैं।
कैसे हम अपनी याददाश्त बनाते हैं, कैसे हम चेहरे पहचानते हैं, कैसे कोई शांत तो कोई उग्र हो जाता हैं, सपने क्यों आते हैं और ना जाने कितने और प्रश्न। विडम्बना ही हैं की पूरे शरीर के हर अंग की संवेदना प्रोसेस करने वाला दिमाग संवेदना रहित होता हैं।
वापस अपने प्रश्न पर आते हैं की सपने क्यों दिखते हैं? इसके लिए कई सिद्धांत प्रचलित हैं। सबसे ज्यादा मान्य सिद्धांत के अनुसार जगे हुए अवस्था में हम नित नई चीज़े देखते या सीखते हैं, जब हम सोते हैं तो दिमाग उसको याददाश्त में तब्दील करता हैं,
हमारा सो रहा मस्तिष्क इस प्रक्रिया में हमे कुछ ना कुछ दीखाता रहता हैं। एक सिद्धांत के अनुसार सपने हमारे इमोशन को दर्शाते हैं, जगे हुए हम किसी ना किसी काम पर फोकस किये रहते हैं लेकिन सोते वक़्त हमारा दिमाग उन्मुक्त हो जाता हैं और इमोशनो के कई परतो में घिर कर तमाम तस्वीर बनता और बिगाड़ता हैं।
सपने सभी देखते हैं और ज़रूर देखते हैं पर सपने को याद रखना विभिन्न लोगों में विभिन्न तरह से होता हैं। वैसे तो हम क्रम से कई सपने देखते जाते हैं पर वो सपना या सपने का हिस्सा ही याद रह जाता हैं जो हम उठने से ठीक पहले देखते है|
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