ग्लोबल वॉर्मिंग क्या है


पृथ्वी के तापमान में हो रही वृद्धि को ग्लोबल वॉर्मिंग कहते हैं। बीसवीं शताब्दी के आरंभ से पृथ्वी के औसत तापमान में 1.1 डिग्री फ़ैरनहाइट की बढ़ोतरी हुई है। पिछले 400 सालों में तापमान इतना नहीं बढ़ा जितना बीसवीं शताब्दी में बढ़ा है।

कार्बन डाइऑक्साइड और वायु प्रदूषण, पृथ्वी के वायुमंडल में एक मोटे कम्बल की तरह जमा हो रहा है जिसमें सूर्य की गर्मी क़ैद हो जाती है और फलस्वरूप पृथ्वी का तापमान बढ़ने लगता है। प्रदूषण पैदा करने वाले प्रमुख स्रोत हैं

कोयला, गैस और तेल। कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्र और मोटर गाड़ियां सबसे ज़्यादा ग्रीन हाउस गैसें पैदा करते हैं।

इसे नियंत्रित करने के लिए ज़रूरी है कि ऐसी टेक्नोलॉजी इस्तेमाल की जाए जिससे प्रदूषण न बढ़े। ग्लोबल वॉर्मिंग से ग्लेशियर अधिक तेज़ी से पिघल रहे हैं जिससे समुद्र स्तर बढ़ रहा है। अगर इसे समय रहते नियंत्रित न किया गया तो तटीय इलाक़े और बहुत से द्वीप डूब सकते हैं, गर्मी, सूखा, बाढ़ और बीमारियां बढ़ जाएंगे और इसका असर सभी पर होगा।



Comments